Jaipur News रविवार देर शाम जयपुर के महेश नगर इलाके में स्थित एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में 10 छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत और बेहोशी की शिकायत के बाद छात्र-छात्राओं को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना से संस्थान में अफरा-तफरी मच गई।

गैस रिसाव बना कारण– Jaipur News
पुलिस के मुताबिक, गटर से उठने वाली जहरीली गैस और छत पर स्थित रसोई से निकलने वाले धुएं ने कोचिंग सेंटर के वातावरण को प्रदूषित कर दिया। इन जहरीली गैसों के कारण छात्रों को सांस लेने में तकलीफ हुई। बेहोश होने वालों में 8 लड़कियां, 2 लड़के और एक रसोइया भी शामिल हैं।
चिकित्सा और स्थिति– Jaipur News
घटना के बाद छात्रों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि छात्रों को सांस लेने में समस्या और खांसी हो रही थी, हालांकि अन्य कोई गंभीर समस्या नहीं पाई गई। पुलिस गैस रिसाव के कारणों की जांच कर रही है।
अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन– Jaipur News
घटना के बाद अस्पताल के बाहर युवाओं की भीड़ जमा हो गई। राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी ने अपने समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस हुई, जिसके बाद चौधरी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। जयपुर सांसद मंजू शर्मा ने भी अस्पताल पहुंचकर छात्रों का हाल जाना।
नेता प्रतिपक्ष ने उठाई जांच की मांग– Jaipur News
राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने घटना को चिंताजनक बताते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने X (ट्विटर) पर लिखा, “गैस रिसाव की यह घटना शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करती है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
#WATCH | Students staged a protest after a few students allegedly fainted at a private coaching centre in Rajasthan's Jaipur (15/12) pic.twitter.com/S2g5Y5QjHA
— ANI (@ANI) December 15, 2024
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल– Jaipur News
टीकाराम जूली ने सरकार से सभी शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लागू करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। इस घटना पर संस्थान और प्रशासन की ओर से अभी कोई बयान जारी नहीं हुआ है।
निष्कर्ष– Jaipur News
इस घटना ने शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा प्रबंधन की कमी को उजागर किया है। सरकार और प्रशासन को छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।