Delhi Election दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का समय नजदीक आ गया है, और कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। हालांकि, पिछले दो चुनावों में पार्टी अपना खाता नहीं खोल सकी थी, लेकिन अब कांग्रेस खुद को एक नई दिशा में लाने के लिए रणनीतियाँ बना रही है। हम यहां कांग्रेस की ताकत, कमजोरियों और उसके सामने मंडराते खतरों पर चर्चा करेंगे।

कांग्रेस की ताकत: महिला सशक्तिकरण और कद्दावर नेता– Delhi Election
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस ने अपनी रणनीति में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। महिलाओं के लिए पार्टी ने ‘प्यारी दीदी योजना’ का ऐलान किया है, जिसके तहत सत्ता में आने पर महिलाओं को 2500 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता देने का वादा किया गया है। यह आम आदमी पार्टी की ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ से एक कदम आगे है, जिसमें महिलाओं को 2100 रुपये की मासिक सहायता देने की बात की गई है। कांग्रेस के इस वादे को चुनावी प्रचार में एक बड़ी ताकत माना जा रहा है।
इसके अलावा, पार्टी ने अपने कई कद्दावर नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा है, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख देवेंद्र यादव, अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा और दिल्ली के पूर्व मंत्री हारून यूसुफ जैसे नेता शामिल हैं। इन नेताओं का चुनावी मैदान में होना कांग्रेस के लिए एक बड़ी ताकत हो सकता है, जो पार्टी की चुनावी संभावनाओं को बेहतर बना सकता है।
कांग्रेस की कमजोरियां: विश्वास की कमी और घटता हुआ वोट प्रतिशत
कांग्रेस पार्टी के लिए दिल्ली में सत्ता में लौटना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। 2013 के बाद से पार्टी दिल्ली में सत्ता में नहीं रही है, और इसने एक मजबूत नेतृत्व का अभाव देखा है। पार्टी लगातार दो चुनाव हार चुकी है, और इस कारण निचले कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी देखी जा सकती है। यह चुनावी कैम्पेन में विपरीत असर डाल सकता है। इसके अलावा, कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि वह अपना गिरता हुआ वोट प्रतिशत रोक सके और उसे फिर से बढ़ा सके।
कांग्रेस के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में AAP ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में से एक बड़ा हिस्सा ले लिया है। पार्टी को अब फिर से इस वोट बैंक को हासिल करने की चुनौती होगी। यदि कांग्रेस अपने पुराने वोटरों को फिर से जोड़ने में सफल होती है, तो यह चुनाव में एक अच्छी स्थिति में आ सकती है।
कांग्रेस के पास एक शानदार मौका: खोने के लिए कुछ नहीं– Delhi Election
2025 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा अवसर यह हो सकता है कि पार्टी के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। पिछले दो कार्यकालों से दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस का कोई भी विधायक नहीं है, और ऐसे में कांग्रेस के पास सिर्फ अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से हासिल करने का मौका है। यदि पार्टी कुछ सीटें जीतने में सफल होती है, तो यह न केवल उसके मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी प्रेरणा देगा।
अगर दिल्ली में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनती है, तो कांग्रेस एक ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है, खासकर अगर वह कुछ सीटें जीतने में सफल हो जाती है। इस स्थिति में पार्टी अपने विरोधियों के बीच सत्ता का बंटवारा कर सकती है, जिससे उसका राजनीतिक महत्व फिर से बढ़ सकता है।
कांग्रेस पर मंडराता खतरा: राजनीतिक सफाया का डर– Delhi Election
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि यदि पार्टी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहती है, तो उसे दिल्ली की सियासत से पूरी तरह से बाहर होने का खतरा हो सकता है। पार्टी पहले ही देश के कई राज्यों में ऐसी स्थिति का सामना कर रही है, और दिल्ली में AAP और बीजेपी की मजबूत उपस्थिति कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
यदि कांग्रेस इस चुनाव में फिर से कमजोर साबित होती है, तो दिल्ली में उसकी राजनीतिक स्थिति और कमजोर हो सकती है, और पार्टी को अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। इस समय कांग्रेस को अपने प्रदर्शन को सुधारने के लिए हर एक कदम पर रणनीति बनानी होगी, ताकि पार्टी दिल्ली की सियासत में अपनी पहचान बनाए रख सके।
निष्कर्ष:
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 कांग्रेस के लिए एक अहम मोड़ पर खड़ा है। पार्टी के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन यदि वह अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से प्राप्त करने में सफल रहती है, तो वह दिल्ली में अपना प्रभाव बना सकती है। हालांकि, उसके सामने गंभीर चुनौतियाँ भी हैं, जिनका सामना करते हुए पार्टी को अपना भविष्य तय करना होगा।