PM Narendra Modi ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने जीवन और राजनीति के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें साझा की। उन्होंने कहा कि उनका जीवन ऐसा रहा कि बचपन के दोस्तों से संपर्क टूट गया, और अब कोई उन्हें “तू” कहकर संबोधित नहीं करता।

स्कूली दोस्तों से संपर्क का टूटना
PM Narendra Modi ने बताया कि उन्होंने बहुत कम उम्र में घर छोड़ दिया था, जिसके कारण स्कूली दोस्तों से संपर्क टूट गया। जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने अपने पुराने दोस्तों को बुलाया, लेकिन वह अनुभव उन्हें संतोषजनक नहीं रहा। उन्होंने महसूस किया कि उनके दोस्त उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में ही देख रहे थे, न कि एक पुराने दोस्त के रूप में।
रासबिहारी मणियार: एकमात्र टीचर जिन्होंने “तू” कहा
PM Narendra Modi ने बताया कि उनके जीवन में रासबिहारी मणियार नामक एक शिक्षक थे, जो उन्हें हमेशा “तू” कहकर संबोधित करते थे। उनका हाल ही में निधन हो गया, और वह उनके जीवन के एकमात्र व्यक्ति थे, जिन्होंने उन्हें इस तरह संबोधित किया।
राजनीति में सफलता: एंबिशन से ज्यादा मिशन का महत्व
PM Narendra Modi ने राजनीति में सफलता के बारे में कहा कि सफलता का राज एंबिशन में नहीं, बल्कि मिशन में है। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधी जी ने कभी सत्ता की चाह नहीं रखी, लेकिन उनका जीवन अपने आप में एक संदेश था। गांधी जी का जीवन “संवाद कला” का सबसे बेहतरीन उदाहरण था।
गांधी जी का अद्वितीय प्रभाव
PM Narendra Modi ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधी जी ने कभी कोई टोपी नहीं पहनी, लेकिन दुनिया भर में “गांधी टोपी” की पहचान बनी। उनके जीवन और विचारों ने दुनिया को अहिंसा का संदेश दिया।
पीएम मोदी का योगदान: शिक्षक और राजनीति
PM Narendra Modi ने यह भी बताया कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने सभी अध्यापकों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया, क्योंकि उनका मानना था कि वह जो कुछ भी हैं, उसमें उनके शिक्षकों का भी योगदान है।