केंद्रीय वित्तमंत्री के बजट का शेयर बाजार ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री ने इसकी तारीफ की है। पाकिस्तान और चीन सीमा पर दोहरी चुनौती झेल रही तीनों सेनाओं को बजट 2021-22 से काफी उम्मीदें थीं। वित्त मंत्री के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए करीब 4.78 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसके लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री दोनों को धन्यवाद दिया है। जबकि सैन्य मामलों के जानकार मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक मेहता कहते हैं कि ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है। सैन्य बलों की चुनौती बढ़ी है और सैन्य आधुनिकीकरण के खाते में कुछ नहीं आया है। रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी के लिए मैं (राजनाथ सिंह) प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को विशेष तौर पर धन्यवाद देना चाहता हूं। रक्षा मंत्री ने ट्वीट करके कहा कि इस बार रक्षा बजट 4.78 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें 1.35 लाख करोड़ रुपये कैपिटल व्यय के रूप में शामिल हैं। यह कैपिटल व्यय में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। यह पिछले 15 वर्षों में कैपिटल व्यय के मद में अब तक की सबसे अधिक राशि है। रक्षा मंत्री के इस संदेश की बारीकियों को भी सहज समझा जा सकता है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान के मोर्चे पर बढ़ रही चुनौती को ध्यान में रखकर अपनी टिप्पणी को केंद्रित की है। रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया आने के बाद मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक मेहता ने अमर उजाला से बात की। उन्होंने कहा कि उत्साहित होने की बहुत जरूरत नहीं है। मेरे ख्याल में सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के नाम पर इस बार रक्षा मंत्रालय के हाथ खाली रहने वाले हैं। जनरल मेहता ने कहा कि हमारी 50 हजार के करीब फौज लद्दाख सीमा पर तैनात है। मथुरा की इंफैंट्री को आर्मर डिवीजन में बदल दिया गया है। यह समझने की बात है कि लद्दाख में सैन्य तैनाती और जरूरत को ध्यान में रखकर दो अरब डॉलर (करीब 14 हजार करोड़ रुपये) के सौदे पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। 1000 करोड़ रुपये आपात खरीद के मद में खर्च हुए हैं। 700 करोड़ का खर्च अचानक हुई सैन्य तैनाती, सैन्य बलों को वहां ले जाने, अन्य संसाधनों के इंतजाम में खर्च हुए हैं। इस तरह से मुझे नहीं लगता कि सैन्य आधुनिकीकरण के मद में कुछ पैसा आने वाला है। ज्यादातर तो पेंशन और तनख्वाह देने और पुराने बही-खाते पूरे करने में खर्च हो जाएंगे। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) मेहता ने कहा कि पिछले साल के बजट में भारतीय वायुसेना के हाथ कुछ खास नहीं आया था। बल्कि उसे जरूरी खर्च से भी 2000 करोड़ रुपये कम मिले थे। नौसेना को कोई 1000-2000 करोड़ रुपये अधिक मिल पाए थे। इसी तरह से भारतीय सेना के हिस्से में 3000-4000 करोड़ रुपये ही सैन्य आधुनिकीकरण के मद में आ सके थे। मेहता का कहना है कि जिस तरीके से लद्दाख क्षेत्र में सैन्य तैनाती लगातार बनी हुई है और पाकिस्तान के साथ-साथ चीन की सीमा पर चुनौतियां बढ़ रही हैं, उसके सामानांतर बजट में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। तीनों सेनाओं के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है और केंद्र सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए था।