BHARAT VRITANT

राज्यसभा में शुक्रवार को भी किसानों का मुद्दा छाया रहा। सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेताओं ने सरकार से तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग की। वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार गांव, गरीब और किसानों के विकास लिए प्रतिबद्ध है। हमारे लिए किसानों का हित सबसे ऊपर है। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि आप बताएं कानून में काला क्या है। उन्होंने कहा कि किसान यूनियन यह नहीं बता पाई कि कानून में क्या कमी है। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार कानून में संशोधन करने के लिए तैयार है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें कोई कमी है। उन्होंने पंजाब सरकारक पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य का कानून किसान विरोधी है। किसान की आमदनी दोगुनी हो इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री किसान योजना के माध्यम से 6,000 रुपये का योगदान दिया। आज हम ये कह सकते हैं कि दस करोड़ 75 लाख किसानों को 1,15,000 करोड़ रुपये डीबीटी से उनके अकाउंट में भेजने का काम किया है। मैं प्रतिपक्ष का धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने किसान आंदोलन पर चिंता की और आंदोलन के लिए सरकार को जो कोसना आवश्यक था उसमें भी कंजूसी नहीं की और कानूनों को जोर देकर काले कानून कहा। मैं किसान यूनियन से 2 महीने तक पूछता रहा कि कानून में काला क्या है। पंजाब सरकार का कानून किसान विरोधी है। पंजाब के कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कानून में किसान को जेल भेजने का प्रावधान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों के प्रति प्रतिबद्ध हैं और रहेंगे। देश आगे बढ़े, किसान आगे बढ़े, देश का इकबाल दुनिया में बुलंद हो। इस आशय को लेकर मोदी सरकार काम कर रही है। भारत सरकार किसी भी संशोधन के लिए तैयार है। संशोधन प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि कानून में कोई कमी है। विपक्ष प्रावधान में एक भी कमी बताएं। किसान बताएं, किस प्रावधान में क्या कमी है। खेती पानी से होती है। कांग्रेस केवल खून से खेती करना चाहती है। एक राज्य के लोगों में गलतफहमी है। विपक्ष बताए कानून में काला क्या है। देश में विपक्ष उल्टी गंगा बहाना चाह रहा है। किसान नेता ये नहीं बता पाए कि कानून में कमी क्या है। किसान को सम्मान देने की कोशिश की। हमने संवेदनशीलता दिखाई। हम खून से नहीं करते खेती। खून से खेती कांग्रेस करती है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिग के एक्ट में बताएं कि कहां लिखा है किसानों की जमीन चली जाएगी। 15वें वित्त आयोग ने ग्राम पंचायतों को 2.36 लाख करोड़ रुपये प्रदान करने की सिफारिश की है, जिसे मंत्रिमंडल ने स्वीकार कर लिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा के लिए लगभग 43,000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। 5 लाख में ग्राम पंचायतों के माध्यम से 2.8 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हमने मनरेगा के लिए लगातार फंड बढ़ाया। जब देश में कोविड-19 आया, तो हमने मनरेगा के लिए आवंटन 61,000 करोड़ रुपये की निधि को बढ़ाकर 1.115 लाख करोड़ रुपये कर दिया। 10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया गया। सरकार की योजनाओं ने गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन में बदलाव किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *