Bharat Vritant

1980 के मॉस्को ओलिंपिक के बाद पहली बार भारतीय मेंस हॉकी टीम ने टोक्यो के ओलिंपिक में पोडियम फिनिश किया। मनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारतीय टीम ने जर्मनी के खिलाफ आपने ब्रॉन्ज मैडल जित लिया है। टोक्यो ओलिंपिक की तरफ पर भारतीय मेंस हॉकी टीम ने मैडल जितने के आपने 41 साल पुराने सपने को पूरा किया है। 1980 के मॉस्को ओलिंपिक के बात पहली बार भारतीय मेंस हॉकी टीम ने टोक्यो में पोडियम फिनिश किया है। भारत के ओलिंपिक में जीते आखिरी मैडल और इस बार के मैडल के बीच एक बात कॉमन रही, दोनों ही उसने एक गोल के अनत में जीते है। दुरसी और जर्मनी की टीम साल 2008 के बात पहली बार हॉकी में ओलिंपिक जितने से चूक गई।

भारत और जर्मनी के बीच ब्रॉन्ज मेडल के लिए चला मुकाबला बड़ा ही दिलचस्प रहा। पहला क्वार्टर पूरी तरह से जर्मनी के नाम रहा, जिसके खत्म होने पर वो 1-0 से आगे रहा। वहीं दूसरा क्वार्टर दोनों टीमों के बीच 3-3 गोल की बराबरी पर खत्म हुआ। यानी दूसरे क्वार्टर में भारत ने 2 गोल खाए तो 3 गोल दागे भी। भारत के लिए ये गोल सिमरनजीत सिंह, हार्दिक और हरमनप्रीत ने दागे। इसके बाद तीसरा क्वार्टर पूरी तरह से भारतीय टीम के नाम रहा। भारत ने इस क्वार्टर में 2 गोल दागे पर खाए एक भी नहीं और इस तरह 5-3 की बढ़त ले ली। इस क्वार्टर में रूपिंदरपाल और सिमरनजीत ने गोल दागे। मैच के आखिरी क्वार्टर में भारत के सामने अपनी बढ़त को बरकरार रखने की चुनौती थी, जिसमें वो कामयाब रहा। आखिरी क्वार्टर में एक गोल जरूर खाए पर बढ़त बरकरार रही।